रविवार

 मेरा मन नही होता अब तुमसे मिलने को हां माना कि पहले मैं ही जिद करती थी तुमसे मिलने की और पहले तुमसे मिलकर मुझे खुशी भी मिलती थी सारी थकान उतर जाती थी तुम्हारे आने की खबर सुन कर एक और बात जो मुझे तुमसे कहनी थी मैं तुम्हें हमेशा से चाहती हूँ जबसे मैंने तुम्हारे बारे में पहली बार जाना था तुम मेरे लिए बहुत प्रिय हो जरूरी से हो उतने ही जरूरी हो जितना गिनती में किसी एक अंक के बाद दुसरे अंक का आना !

तुमसे मिलने की बेचैनी हमेशा बनी रहती थी और इतनी बैचेनी, बेताबी तुमसे मिलने की हो भी क्यों न बचपन से लेकर आज तक का साथ रहा है तुम्हारा मेरा आज तक भी तुम्हारा इंतज़ार मैंने बड़ी दिल्लगी के साथ किया है।

तुम्हारे आने का इंतजार मुझे तब से होता है जब से तुम जाने का इंतजाम कर रहे होते हैं ।

शायद ही कोई प्रेमिका होगी जो अपने प्रेमी के निठल्ले होने पर भी ऐतबार न जताए मगर मुझे तुम्हारा इस तरह का रवैया भी पसंद है। 

तुम बेकार, बेरोजगार होने के बाद भी हर बार पूरे परिवार के लिए जो खुशियां बटोर ले आते होना ये अदा तो मुझे तुम्हारी बेहद पसंद है ।

पसंद है मुझे तुम्हारा खामोशी से जाना और मस्ती से आना।

लेकिन अब मैं तुम्हारे साथ जीना नहीं चाहती मेरा मन तुमसे ऊब गया है । तुम्हारा इंतज़ार करने का मन भी नहीं करता पहले तुम्हे देखकर कर थकान उतर जाती थी


लेकिन अब तो थकान चढ़ जाती है । तुममें पहले जैसी बात नही रही तुम चले जाओ।


Oh Mr. रविवार चले जाओ।

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