दर्द

 दर्द शारीरिक हो या मानसिक इन्सान की सोचने समझने कि शक्ति ख़तम कर देता हैं!!... कोई दर्द मीठा होता हैं कोई दर्द खट्टा होता हैं कोइ दर्द कड़वा होता हैं !! हर इक मीठा दर्द हम सहन कर लेते हैं, हर इक खट्टा दर्द हमारी जिज्ञासा को बढ़ाता है,  हर कड़वा दर्द हमें मौत का एहसास करवाता है !! कितना आसान है यह कहना कि दर्द हैं उतना ही मुश्किल होता है दर्द सहना !! दर्द कभी कभी इतना असहनीय हो जाता हैं कि हम चिलाने लगते हैं हम चीख़ते है अपनो से झगड़ने लगते हैं, जल्द से जल्द हम इससे निजात पाने के लिए हर प्रयास करते हैं !! जब कभी हम दर्द से हार जाते हैं तो आंखो से आंसू निकल कर ज़मीन पर गिर जाते हैं ठीक वैसे ही जैसे एक प्रेमी अपनी प्रेमिका के प्यार में गिर जाता है और अपने दिल हारा हुआ पाता है और सुकून के साथ अपने आप को छोड़ देता है प्रेमिका के हवाले !!

दर्द में हम ये भूल जाते हैं कि हमारे गर्भ से जिस दर्द ने जनम लिया है वो हमें एक नहीं जिन्दगी देता है ठीक वैसे जैसे एक इस्त्री के गर्भ से जन्म लेकर इक जीव उसे मां कि ममता से भरी नई जिंदगी देता है !! फिर हम क्यों भुल जाते हैं कि ये दर्द हमारी जिन्दगी ख़तम नहीं कर रहा बल्कि एक नई जिंदगी दे रहा है!!  

दर्द में मज़बूत बने रहो ,, हर बार हर दर्द के बाद एक नई जिंदगी का स्वागत करते रहें !!  

दर्द से हमे मरना नहीं दर्द से हमे जीना है , एक नई जिंदगी के साथ❣️

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